डॉली डबराल की 11वीं पुस्तक "अर्पण का तर्पण" कहानी संग्रह का लोकार्पण - देवांचल टाईम्स

ब्रेकिंग न्यूज़

Tuesday, October 6, 2026

डॉली डबराल की 11वीं पुस्तक "अर्पण का तर्पण" कहानी संग्रह का लोकार्पण

 डॉली डबराल की 11वीं पुस्तक "अर्पण का तर्पण" कहानी संग्रह का लोकार्पण नगर निगम हाल में किया गया ।

मुख्य अतिथि रहीं पूर्व वाइस चांसलर डॉ सुधा रानी पांडे एवं अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री असीम शुक्ल जी ने की। इस आयोजन में शहर के सुविख्यात कथाकार मदन शर्मा जी, जितेन ठाकुर डॉ .सविता मोहन, डॉ .राम विनय सिंह के साथ-साथ देश विदेश में प्रसिद्ध गीतकार डॉ. बुद्धि नाथ मिश्र जी की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमामय कर दिया। बेहद खूबसूरत मधुर आवाज में ज्योति ओझा जी की सरस्वती वंदना ने मन को जागृत कर दिया । उसी के साथ सुरीले गीतकार श्री अरुण भट्ट जी ने स्वागत गीत गाकर सभी का स्वागत किया ।
दीप प्रज्वलन के पश्चात सभी मंचासीन अतिथियों ने पुस्तक को लोकार्पित किया।
 इस आयोजन में लेखिका ने शहर की तेरह  नामी कवयित्रियों को अपनी तेरह कहानियों पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया था। यह एक नवीन प्रयोग था जिससे कि कविता में रुचि रखने वाले साहित्यकार भी गद्य में रुचि रखें और गद्य पढ़ें।
महादेवी काॅलेज की पूर्व  हिंदी विभागाध्यक्ष डाॅ.विद्या सिंह ने 'अंतिम  घड़ी ' कहानी के लिए  कहा कि "ये कहानी संयुक्त परिवार में रहनेवाली नौकरी पेशा स्त्री के इर्द-गिर्द बुनी गई  है।"
सुश्री यामा शर्मा जी ने  कहानी "सरकारी नौकरी" पर कहा की गरीबी युवा के भविष्य को रोक नहीं सकती लेकिन व्यवस्था की लापरवाही और बेईमानी उसके अनंत संघर्ष को कठिन बना देती है।"
डॉ .भारती मिश्रा जी ने डॉली जी के एक संस्मरण "अनोखे गांव की सैर चोखी ढांणी"  पर कहा की चौकी ढांणी की लोक संस्कृति और ग्रामीण जीवन को यह आलेख जीवंत करता है।"
मशहूर कवयित्री मणि अग्रवाल जी ने "सच हुए सपने" कहानी के लिए कहा की "कहानी पढ़ते हुए झमन में सबसे पहले यह भाव आया कि यह केवल नायिका के सफल नृत्यांगना बनने की कहानी नहीं है यह उस सपने की कहानी है जिसे परिस्थितियां दबा तो सकती हैं लेकिन भीतर से मिटा नहीं सकती।"

डॉ. क्षमा कौशिक जी ने "पतली कमर" नामक कहानी पर टिप्पणी करते हुए कहा "नारियों की सौंदर्य के प्रति स्वाभाविक मनोवृत्ति को उजागर करती मनोरंजक एवं संदेश परक कहानी है जो पाठक को आद्यांत बांधे रखती है कहानी की भाषा एवं शैली उसे और भी  विशिष्ट बनाती है।"
डॉ .निशा अतुल्य जी ने 'वो लड़का' कहानी के बारे में कहा " यह कहानी नारी के उस मनोभाव के अंदर की कहानी है जो वह खुद को भूलकर खुद को ही ढूंढने की कोशिश करती है।"
मशहूर शायरा आभा 'दूनवी'  ने कहा की 'डोर' कहानी अत्यंत मर्म स्पर्शी, गहन और स्त्री मन के मनोवैज्ञानिक संघर्षों का एक सजीव दस्तावेज है। "
साहित्यकार डॉ.उषा झा जी ने कहा 'मेरा कमरा' दिल छू लेने वाली कहानी है । इस कहानी के दृश्य और पात्र एकदम सजीव है । कहीं भी कोई बनावटीपन नहीं। लेखिका ने स्त्री विमर्श पर उत्कृष्ट लेखनी चलाई है।"
मंचासीन प्रतिष्ठित कथाकार मदन शर्मा जी ने कहा की "सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉली डबराल के नव प्रकाशित कथा संग्रह अर्पण का तर्पण में शामिल सभी कहानियां, व्यंग्य कथाएं एवं संस्मरण उच्च स्तरीय हैं 'अंतिम घड़ी' और 'वो लड़का' कहानियों को एक बार नहीं बार-बार पढ़ा जा सकता है।"
वरिष्ठ गीतकार  श्री शिव मोहन सिंह जी ने कहा कि "कथाकार ने अपनी कहानी "ये पब्लिक है सब  जानती है" के माध्यम से समाज में  व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर समस्या को तथा उनमें राजनीतिक संलिप्तता को हास्य-व्यंग्य का पुट देते हुए बड़े मनोरंजक ढंग से उजागर किया  है।"
आयोजन की अध्यक्षता करते हुए साहित्यकार असीम शुक्ल जी ने कहा... "कहानियां कमल हैं विवादों के शैवाल जाल में जाने से बचाने में भाषा का अप्रतिम योगदान है"
कार्यक्रम  की मुख्य अतिथि डॉक्टर सुधा रानी पांडे पूर्व वाइस चांसलर ने पुस्तक की प्रशंसा करते हुए कहा "अर्पण का तर्पण डाॅली डबराल की बहु चर्चित तेरह कहानियों का संग्रह है। इन कहानियों में समकालीन समाज के अनेक बहुरंगी चित्रों के साथ लेखिका ने मानव मन की विसंगतियों और सहज अनुभूतियों को साकार करते हुए जिस प्रकार अभिव्यक्त किया है वह अपने आप में निराली बात है । डॉली डबराल साहित्य ...विशेष रूप से कथा साहित्य जगत की सशक्त हस्ताक्षर हैं। युग जीवन के भोगे यथार्थ के साथ संगति बिठाती उनकी कहानियां हमारे आसपास में प्रतिदिन घटने वाले क्षणों का सम्मूर्तन है जहां से मानव जीवन और मन एक नया संसार रचता है...."
इसी आयोजन में सुप्रसिद्ध शायर इकबाल आज़र को उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए "डॉ. शेरजंग गर्ग स्मृति सम्मान" से मुख्य सूचना आयुक्त श्रीमती राधा रतूड़ी एवं पूर्व डीजीपी श्री अनिल रतूड़ी के द्वारा विभूषित किया गया। सुविख्यात शायर शादाब अली शादाब  जी ने उनका परिचय  पढ़ते हुए  कहा कि....बचपन से काव्य  में रुचि रखने वाले इक़बाल आज़र साहिब ने अपने व्यस्ततम और कठिन  क्षणों में भी अदब का साथ नहीं छोड़ा....."
  कार्यक्रम  में उत्तराखंड  के नामी-गिरामी साहित्यकारों से पूरा सभागार  भरा हुआ  रहा भारत विकास परिषद  के केंद्र स्थित अधिकारी श्री तरुण त्यागी जी के साथ अन्य लोग भी दिल्ली से पधारे। अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के दे दून के अध्यक्ष श्री एस एस कोठियाल जी संरक्षक श्री चन्द्रगुप्त जी सपत्नीक पधारे । राष्ट्रीय कवि संगम के क्षेत्रीय मंत्रीं 
 श्री कांत श्री भी अपने अन्य सदस्यों के साथ उपस्थित. रहे।
उद्गार संस्था के अध्यक्ष सुप्रसिद्ध गीतकार श्री शिव मोहन सिंह जी एवं उद्गार संस्था के सभी सदस्य उपस्थित रहे । जिजीविषा ,और वरिष्ठ नागरिक काव्य मंच ,तथा हिंदी साहित्य समिति के वरिष्ठ सदस्यों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान  की।
अंत में लेखिका ने अपने उद्बोधन  में कहा कि ये सभी कहानियां स्त्री विमर्श पर रोज़मर्रा  के जीवन में घटी वह घटनाएं हैं जिन्हें शब्दों से अलंकृत कर कहानी का रूप दे दिया गया है।यह कथा-संग्रह भी उनकी अन्य  पुस्तकों की तरह किसी साहित्यिक पुरस्कार की अभिलाषा के लिए नहीं बल्कि आम महिलाओं में पढ़ने-लिखने की प्रवृत्ति को जागृत करने के लिए लिखा गया है।आज तेजी से लोगों में पढ़ने के प्रति रुझान कम हो रहा है। इसलिए सरल भाषा में सरल कहानी लोगों की समझ में आसानी से आ जाती है।
लेखिका ने देहरादून के सभी अखबारों का धन्यवाद करते हुए कहा कि देहरादून ही यह शहर है जहां के सभी अखबारों में साहित्यिक अनुष्ठानों को प्रचुर मात्रा में   स्थान मिलता है।
जीडीपी शाह महिला अभिव्यक्ति मंच के अंतर्गत यह कार्य क्रम सभी महिलाओं के सफल प्रयास से संभव हो सका कार्यक्रम का बहुत सुंदर संचालन श्रीमती बीना बैंजवाल जी ने किया।
इसी अवसर पर आज के दिन  आदरणीय जितेन ठाकुर , इक़बाल आजर साहब, रमाकांत जी, और डाॅ बुद्धिनाथ मिश्र  जी को उनके जन्मदिन  की बधाई  और उपहार  प्रदान  किए गए।

No comments:

Post a Comment

Note: Only a member of this blog may post a comment.