देहरादून । इस संसार में मनुष्य अकेला आता है और अकेला चला जाता है। कोई भी उसका साथ नहीं देता।
उक्त विचार श्री एस एस जैन सभा तिलक रोड में प्रवचन करते हुए प्रवचन प्रभाविका मधुर गायिका साध्वी डॉ श्रीसमीक्षा जी महाराज ठाणे 3 ने व्यक्त किए। महाराज श्री ने कहा कि मुनि महाराज ने राजा को अनाथ कहा यह सुनकर राजा को अच्छा नहीं लगा। वह सोचने लगा कि मैं तो राजा हूं और मेरा परिवार भी है। फिर मैं अनाथ कैसे हो गया। तब
मुनि महाराज कहते हैं। राजन आप राज पाट चला रहे हो धर्म, ज्ञान की ओर आपका ध्यान नहीं है। तो जिनके जीवन में धर्म ज्ञान नहीं होता है वह अनाथ ही होता है और जो व्यक्ति धर्म ज्ञान में लगा होता है । वह सनाथ होता है। उन्होंने कहा कि हम संसार में आकर धन कमाने में लग जाते हैं और धर्म, ज्ञान की ओर हमारा ध्यान बिल्कुल भी नहीं होता है । एक दिन हम यह संसार छोड़ कर चले जाते हैं। जीवन भर कमाया हुआ धन यहीं छूट जाता है। खून के रिश्ते भी यही छूट जाते हैं। कोई भी हमारा साथ नहीं देता है। केवल धर्म ज्ञान ही है जो हमारी रक्षा करता है । किन्तु हम इस ओर ध्यान ही नहीं देते।
मुनि महाराज कहते हैं। राजन आप राज पाट चला रहे हो धर्म, ज्ञान की ओर आपका ध्यान नहीं है। तो जिनके जीवन में धर्म ज्ञान नहीं होता है वह अनाथ ही होता है और जो व्यक्ति धर्म ज्ञान में लगा होता है । वह सनाथ होता है। उन्होंने कहा कि हम संसार में आकर धन कमाने में लग जाते हैं और धर्म, ज्ञान की ओर हमारा ध्यान बिल्कुल भी नहीं होता है । एक दिन हम यह संसार छोड़ कर चले जाते हैं। जीवन भर कमाया हुआ धन यहीं छूट जाता है। खून के रिश्ते भी यही छूट जाते हैं। कोई भी हमारा साथ नहीं देता है। केवल धर्म ज्ञान ही है जो हमारी रक्षा करता है । किन्तु हम इस ओर ध्यान ही नहीं देते।
परम पूज्य प्रवचन प्रभाविका सरलमना महासाधवी श्री सुचेता जी महाराज ने कहा कि हम संसार में आकर खाने पीने और धन कमाने में लग जाते हैं। धर्म ज्ञान की ओर हमारा ध्यान बिल्कुल भी नहीं होता है। जब हम जप, तप करते हैं तब हमारी आत्मा निर्मल होती है और हमारे बुरे कर्म कटते हैं। श्रावक, श्राविकाओं के लिए चातुर्मास एक सुनहरा अवसर है। जिसमें श्रावक श्राविकाएं , सन्तों की शरण में रहकर जप तप कर अपनी आत्मा को निर्मल बनाकर अपना जीवन सुधार सकते हैं।
इस अवसर पर पंजाब से आए हुए महाराज जी के भक्त विनय जैन एवम् मनोज कुमार जैन को प्रधान जी श्री अरूण कुमार जैन एवम् पूर्व प्रधान श्री महेन्द्र कुमार जैन, महामंत्री श्री अनिल कुमार जैन ने माला और पटका, देकर सम्मानित किया। उपाध्यक्ष श्री डी के जैन, पूर्व अध्यक्ष श्री अनिल कुमार जैन व बडी संख्या में श्रावक श्राविकाएं उपस्थित रहे।

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